जीवन

बचपन मे अंधेरे से डर लगता था,
बड़े होकर उसी अंधेरे में जीवन बिताना पड़ता है।
बचपन लौटकर आता नही,
बड़े होके जीवन कटता नही।
बचपन मे सब आसानी से मिलता है,
बड़े होके मेहनत से हासिल करना पड़ता है।
बचपन के सपने मिठी नींद देते है,
बड़े होके सपने पूरे करने के लिए जागते है।
रातों के भी दिन करने पड़ते है।
बुढ़ापे में आराम मिलने के लिए,
जिंदगी का उसूल ही यही है,
जिंदगी खत्म हो जाती है,
और हम तरसते है दो पल का सुख पाने के लिए।

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